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US Deportation to India: 5 फरवरी को अमेरिका का C - 17 मिलिट्री प्लेन 104 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर लौटा। जब अवैध प्रवासियों ने भारत की जमीन पर पैर रखा तो पता चला कि अमेरिका में उनके साथ कितनी क्रूरता हुई। आज दिन भर विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर हंगामा किया। कई सांसद हाथों में हथकड़ी पहन कर संसद पहुंचे। विपक्षी दलों ने इस अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा की और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की।
विपक्ष का आक्रोश
कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने राज्यसभा में इस घटना को देश के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने सरकार से चार प्रमुख सवाल पूछे:
क्या सरकार जानती है कि 5 फरवरी को 104 भारतीयों को हथकड़ी और बेड़ियों में बांधकर अमानवीय तरीके से वापस भेजा गया? अमेरिका में ऐसे कितने भारतीय डिटेंशन सेंटर में हैं, और क्या उन्हें काउंसलर एक्सेस दिया गया है? क्या सरकार मानती है कि रोजगार के अवसर न मिलने के कारण ये लोग विदेश जाने को मजबूर हुए? जब कोलंबिया जैसे देश ने अपने नागरिकों के साथ ऐसे व्यवहार पर अमेरिका को चुनौती दी, तो भारत क्यों नहीं?
अन्य विपक्षी नेताओं, जैसे डीएमके के तिरुचि शिवा, तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले, और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार से अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस विषय पर सख्त बातचीत करने की मांग की।
सरकार का जवाब
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका अवैध भारतीय प्रवासियों को संगठित तरीके से वापस भेज रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंसी के मानक प्रक्रियाओं के तहत कुछ मामलों में नियंत्रण उपकरणों का उपयोग किया जाता है, लेकिन महिलाओं और बच्चों को इससे मुक्त रखा जाता है। जयशंकर ने आश्वासन दिया कि भारत सरकार अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि भारतीय नागरिकों के साथ कोई दुर्व्यवहार न हो।