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ISI Agent Arrested: सीमा पर संघर्षविराम के बाद भले ही गोलियों की आवाज़ शांत हो गई हो, लेकिन भारत के भीतर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की साजिशें लगातार जारी हैं। पहलगाम हमले के बाद सरकार और खुफिया एजेंसियां देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं और इन छिपे हुए नेटवर्क को उजागर करने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रही हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा की गई दो अहम गिरफ्तारियों ने इस पाकिस्तानी साजिशों को एक बार फिर सामने लाकर रख दिया है।
वाराणसी से पकड़ा गया तुफैल: 'गजवा-ए-हिंद' का सिपाही
उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी से एक युवक तुफैल को गिरफ्तार किया है, जो खुद को ‘गजवा-ए-हिंद’ का सिपाही बताता था। लेकिन जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के हनी ट्रैप में बुरी तरह फंस चुका था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तुफैल का संपर्क पाकिस्तानी महिला एजेंट ‘नफीसा’ से था, जो खुद को कभी अपने असली नाम से पेश नहीं करती थी। नफीसा तुफैल से लगातार उसकी लोकेशन और तस्वीरें मंगवाती थी — खासकर वाराणसी, दिल्ली और अन्य संवेदनशील स्थानों से।
तुफैल ने अपने मोबाइल की जीपीएस लोकेशन ऑन कर रखी थी, जिससे वह जो भी फोटो भेजता, उसमें सटीक लोकेशन भी दर्ज होती। यह डेटा सीधे पाकिस्तान के पास पहुंच रहा था। एटीएस को तुफैल के फोन से पाकिस्तान के 800 से अधिक मोबाइल नंबर मिले हैं। इतना ही नहीं, तुफैल 19 व्हाट्सएप ग्रुप चलाता था, जिनमें से अधिकतर सदस्य वाराणसी और आजमगढ़ क्षेत्र से थे। इन ग्रुप्स के माध्यम से वह मौलाना साद और अन्य कट्टरपंथी नेताओं के वीडियो और भाषण युवाओं तक पहुंचाता था, जिनमें ‘गजवा-ए-हिंद’ के लिए युवाओं को उकसाया जा रहा था।
तुफैल की कट्टरपंथ की तरफ झुकाव की शुरुआत पांच साल पहले हुई थी, जब वह एक मजलिस में पाकिस्तान के चरमपंथी संगठन 'तहरीक-ए-लब्बैक' से जुड़े मौलाना शाह रिजवी के संपर्क में आया। इसके बाद उसने यूपी, हैदराबाद और पंजाब में कई मजलिस बैठकों में भाग लिया, जो धर्म के नाम पर कट्टर विचारधारा फैलाने के केंद्र बन चुके थे। एटीएस ने उसके डिवाइस से डिलीट की गई कई चैट्स को रिकवर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही कोर्ट से उसकी रिमांड मांगी जाएगी।
कबाड़ी वाला बनकर ISI को पैसे भेजता था हारून
दूसरी तरफ दिल्ली से गिरफ्तार किया गया कबाड़ी वाला हारून नाम का युवक एक और खतरनाक कड़ी बनकर सामने आया है। एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि हारून, पाकिस्तान उच्चायोग में कार्यरत अधिकारी मुजम्मिल हुसैन के लिए भारत में फर्जी बैंक खाते खोलने का काम करता था। इन खातों का इस्तेमाल उन लोगों से पैसे मंगवाने में किया जाता था जो पाकिस्तान का वीजा लेने की प्रक्रिया में शामिल थे। ये रकम हारून के ज़रिए मुजम्मिल तक पहुंचाई जाती थी और फिर वहां से ISI एजेंटों तक वितरित की जाती थी।
सूत्रों का मानना है कि इन खातों से भेजी गई रकम का इस्तेमाल भारत में सक्रिय जासूसी नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों को फंड करने में हो रहा था। एटीएस अब हारून के मोबाइल डेटा, बैंकिंग लेनदेन और उससे जुड़े सभी खातों की गहन जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि पिछले तीन वर्षों में किन लोगों को कितनी राशि ट्रांसफर की गई और इन पैसों का वास्तविक उपयोग क्या था।
आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं क्योंकि जांच अब उन नेटवर्क तक पहुंच रही है जो सामान्य नागरिकों की आड़ में देश के खिलाफ युद्ध छेड़े बैठे हैं।