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राष्ट्रीय

News by Goldi   30 Apr, 2025 17:39 PM
Justice BR Gavai: सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई को भारत का 52वां मुख्य न्यायाधीश (CJI) नियुक्त किया गया है। वे 14 मई 2025 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। यह नियुक्ति वर्तमान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के 13 मई को सेवानिवृत्त होने के बाद प्रभावी होगी, जिन्होंने जस्टिस गवई के नाम की सिफारिश की थी।
 
जस्टिस गवई का ऐतिहासिक कार्यकाल

जस्टिस गवई का कार्यकाल करीब छह महीने का होगा, क्योंकि वे 23 नवंबर 2025 को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे। वे जस्टिस केजी बालकृष्णन के बाद अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से दूसरे मुख्य न्यायाधीश होंगे, जो 2007 से 2010 तक इस पद पर रहे। यह नियुक्ति सामाजिक समावेशन और न्यायपालिका में विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
 
कानूनी करियर और उपलब्धियां

24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में जन्मे जस्टिस गवई ने 1985 में वकालत शुरू की। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में स्वतंत्र प्रैक्टिस से पहले पूर्व महाधिवक्ता राजा एस भोंसले के साथ काम किया। 2003 में वे बॉम्बे हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 2005 में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए। 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया। 
 
जस्टिस गवई कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 2016 की नोटबंदी को वैध ठहराने, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, और चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित करने वाले फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ आदेश दिया कि बिना कानूनी प्रक्रिया के संपत्ति ध्वस्त करना असंवैधानिक है। 
 
न्यायपालिका में योगदान और सामाजिक प्रभाव

जस्टिस गवई (Justice BR Gavai) के पिता, स्वर्गीय आरएस गवई, बिहार और केरल के पूर्व राज्यपाल और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनके नेतृत्व में न्यायपालिका को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने गुजरात में एक सम्मेलन में कहा था कि न्यायपालिका में जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है, वरना लोग "भीड़ का न्याय" अपनाने लगेंगे। 
 
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पर इस नियुक्ति की घोषणा करते हुए इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। जस्टिस गवई का कार्यकाल भले ही संक्षिप्त हो, लेकिन उनके अनुभव और निष्पक्षता से न्यायिक प्रणाली को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
 
 

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