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Nitish Kumar: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार (30 दिसंबर 2024) शाम दिल्ली से पटना लौट आए। दिल्ली में उनकी मुलाकात पीएम नरेंद्र मोदी या जेपी नड्डा जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं से नहीं हो पाई। माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसे लेकर अब बिहार के राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। राजद का दावा है कि दिल्ली में नीतीश कुमार को महत्व नहीं दिया गया। भाजपा जदयू को तोड़कर नीतीश कुमार को कुर्सी से उतारेगी।
दरअसल सीएम नीतीश कुमार पिछले रविवार (29 दिसंबर 2024) को दिल्ली गए थे। पहले दिन नीतीश कुमार ने दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के परिजनों से मुलाकात की। वे रूटीन चेकअप के लिए दिल्ली गए थे। हालांकि, वे ऐसे समय गए जब बिहार में राजनीतिक उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं। कयासों का बाजार गर्म है कि क्या नीतीश कुमार फिर से पाला बदलेंगे? हालांकि, तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन के दरवाजे बंद हैं। हालांकि, राजनीति संभावनाओं का खेल है। कब क्या हो जाए, यह कहना मुश्किल है।
'खेल उजागर हो रहा है'
नीतीश कुमार के पटना लौटते ही राजद ने बड़ा दावा किया है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि एनडीए में भाजपा और जदयू के बीच चल रहा खेल अब उजागर हो रहा है। नीतीश कुमार दिल्ली गए, लेकिन भाजपा ने उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी। न तो पीएम मोदी ने उन्हें मिलने का समय दिया और न ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने, जबकि नीतीश कुमार के बल पर ही केंद्र में एनडीए की सरकार चल रही है।
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पटना पहुंचने के बाद भी नीतीश कुमार ने मीडिया को इस बारे में कुछ नहीं बताया कि उन्होंने केंद्र के शीर्ष नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं की? यह गंभीर मसला है। भाजपा जदयू को तोड़कर नीतीश कुमार को कुर्सी से उतार देगी। जिसका डर था, वह अब सच हो रहा है।
जदयू का टेढ़ा जवाब
राजद के दावे पर जदयू ने सीधा जवाब नहीं दिया है। जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा कहते हैं कि राजद का ध्यान अपनी पार्टी से ज्यादा नीतीश कुमार पर है। शायद यही वजह है कि वे अंदर से खुद को खोखला महसूस करते हैं और हमेशा एनडीए में कुछ न कुछ गलत ढूंढते रहते हैं। भ्रम फैलाने की कोशिश हमेशा ना
काम होती है।